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Monday, July 9, 2018

पर्दे का एहतराम


हुज़ूर सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम इरशाद फ़रमाते हैं कि आँख भी ज़िना करती है तो जो शख़्स अपनी नज़र को क़ाबू में नहीं रख पाता तो उसे चाहिये कि निकाह़ करे और अगर इसकी इस्तिताअ़त ना रखता हो तो रोज़ा रखे कि रोज़ा शहवत को तोड़ देता है