Monday, July 16, 2018

फ़तेह मक्का और दर्स ए इंसानियत

               
     20 रमज़ानुल मुबारक वो मुक़दस तरीक है जिस दिन नब्बी ए अकरम (صلی الله علیہ وسلم) और आप के जलीलुल क़दर सहाबा (رضوان الله تعالیٰ علیهم اجمعين) ने मक्का सरीफ को कुफार के कब्जे से आज़ाद करवाया,

Sunday, July 15, 2018

हदीश. पाकी के मसाइल



   हदीस-:  हज़रते याला रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है की रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक आदमी को मैदान मे नहाते देखा और फिर मिम्बर पर तशरीफ ले जाकर अल्लाह की हम्द व सना के बाद

हदीश: क्या सोहर को बीवी गुस्ल दे सकती है

ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ                                              



حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، ‏‏‏‏‏‏حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ خَالِدٍ الذَّهَبِيُّ، ‏‏‏‏‏‏حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَاق، ‏‏‏‏‏‏عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبَّادِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، ‏‏‏‏‏‏عَنْ أَبِيهِ، ‏‏‏‏‏‏عَنْ عَائِشَةَ، ‏‏‏‏‏‏قَالَتْ:‏‏‏‏  لَوْ كُنْتُ اسْتَقْبَلْتُ مِنَ الأَمْرِ، ‏‏‏‏‏‏مَا اسْتَدْبَرْتُ مَا غَسَّلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَيْرُ نِسَائِهِ .

Saturday, July 14, 2018

हज़रत उमर के ज़माने के गवर्नर



   
    हजरत सईद बिन आमिर رضی اللہ عنہ हजरत उमर फारूक رضی اللہ عنہ के दौर में एक इलाके के गवर्नर थे उस वक्त अमीरुल मोअमिनिन शहर के जामिआ मस्जिद में जाते और आम लोगों से गवर्नर की बाबत पूछते के लोगों तुम्हे गवर्नर से कोई शिकायत तो नही ?

ज़कात का इस्लामी नियम



               
       यदि कमाई का सारा अधिकार कमाने वाले से छीन लिया जाए तो मनुष्य के अंदर कोशिश करने की भावना नहीं रहती,खोज-परख की शक्ति बाकी नहीं रहती. और वह हर्ष व उल्लास नहीं रहता जो इंसान को अपनी कोशिश का नतीजा देख कर प्राप्त होता है.

इस्लाम में सगुन को कैसा माना गया है.


         
     इस्तेखा़रा और "शगून" में बहुत फ़र्क़ है इस्तेखा़रा में किसी नये काम शुरू करने में अल्लाह से दुआ़ करना और उसकी मर्ज़ी माअ़लूम करना मक़सद होता है। जबकि शगून जादूगरो, छू- छा करने वाले, सितारों से, परिन्दो से, सिफ्ली इल्म जानने वालो से,  नुजूमीयो से  ज्योतिषीयों, वगै़रह , और इस तरह की दूसरी चीज़ों के जरिए लेते हैं।

घर की नसुहत


  
   हदीस:-हज़रत इब्ने ऊमर व हज़रत सहल  बिन सअ़द [रदिअल्लाहो तआला अन्हुमा ] से रिवायत है कि हुज़ूरे अकरम ने इरशाद फरमाया-