Saturday, July 14, 2018

एक अच्छी अखलाक वाली बीवी का वाकिया


कोई शौहर अपनी बीवी से पागल पन की हद तक मौहब्बत केसै कर सकता है  ?  


{एक तजरबे कार उमर याफता बा वकार टैलेंटेड खातुन का इंटरव्यु जिन्होने अपने शौहर के साथ पचास साल का अरसा पुर सुकुन तरीकै से हंसी खुशी गुजारा}   



*खातुन से पूछा गया कि इस पचास साला पुर सुकुन जिन्दगी का राज़ किया है ?

*क्या वो खाना बनाने मे बहुत माहिर थी ?या उनकी खुबसुरती उस का सबब है ?  या तीन चार  बच्चौ का हौना उस की वजह है या फिर कौइ ओर बात ???

*खातुन ने जवाब दिया पुर सुकुन शादी शुदा जिन्दगी का दारो मदार अल्लाह तबारक व तआला की तौफिक़ के बाद ओरत के हाथ में है ,औरत चाहै तो अपने घर को जन्नत बना सकती है और वौ चाहै तो उस के बर अक्स जहन्नम भी बना सकती है ।



      इस सिलसिले मे माल व दौलत का नाम भी मत लिजिए बहुत सारी मालदार ओरतें जिन की जिन्दगी अजीरन  बनी हुइ है शौहर उन से भागा भागा रहता है

खुश हाल जिन्दगी का सबब औलाद भी नही है बहुत सारी औरतैं हैं जिनकी दसयो बच्चैं हैं फिर भी वौ शोहर की मोहब्बत से महरुम हैं बल्की तलाक़ तक नोबत आ जाती है 

बहुत सारी ख्वातिन खाना पकाने में माहिर होती हैं दिन दिन भर खाना बनाती रहती हैं लैकिन फिर भी उन्है हसबैंड की बदसुलुकी की शिकायत रहती हे 


          *इंटरव्यु लेने वाली खातुन सहाफी को बहुत हैरत हुइ ,उस ने पूछा फिर आखिर इस खुशहाल जिन्दगी का राज़ किया है ??? 

बुढी खातुन ने जवाब दिया : जब कभी मैरा शौहर इन्तहाही गुस्से में होता है तो में खामोशी का सहारा ले लेती  हुं   लैकिन  उस खामोशी में भी अहतराम शामिल होता है में अफसोस के साथ सर झुका लेती हुं     एेसे मौके पर बाअज़ ख्वातिन खामोश तो हो जाती हैं लेकिन उस में तमस्खुर का अनसिर शामिल होता है  इस से बचना चाहिये, समझदार आदमी उसे  फोरन भांप लेता है  

स्टोरी कवर करने वाली खातुन ने पूछा : ऐसे मोके परआप कमरे से निकल क्युं नही जातीं ?
बुढी खातुन ने जवाब दिया :नहीं, ऐसा करने से शोहर को ये लगेगा कि आप उस से भाग रही हैं ,  आप उसे सुन ना भी नही चाहती  हैं  ऐसे मोके़ पर बहुत सन्जीदा या नदामती तरीके.पर खामोश रहना चाहिये   और जब तक वो पुर सुकुन ना हो जाऐ. उसकी किसी बात की मुखालफत नही करना चाहिये .
जब शोहर किसी हद तक पुर  सुकुन हो जाता है तो में कहती हुं : पूरी हो गई आप की बात?  फिर में कमरे से चली जाती हूं क्युं की शोहर बोल बोल  कर थक चुका होता है ओर चिखने चिल्लाने के बाद अब उसे थोडे आराम की जरूरत होती है .में कमरे से निकल जाती हुं ओर अपने माअमुल के कामौं में मसरूफ  हो जाती हुं



*खातून सहाफी ने पूछा :उस के बाद आप किया करती हैं ?किया आप बात चित बंद करने  का असलूब अपनाती है? एक आधा हफ्ते तक बोल चाल नहीं करती हैं ?

बूढी  खातून ने जवाब दिया :नहीं इस बुरी आदत से हमेशा बचना चाहिए ये दो धारी हथियार है जब आप एक हफ्ते तक शोहर से बात  चित नहीं करेंगी ऐसे वक़्त में जब की उसे आप के साथ मुसालिहत (सुलह) की  ज़रूरत है तो वो इस कैफियत का आदि हो जायेगा और फिर ये चीज़ बढ़ते बढ़ते खतरनाक किसम की नफरत की शक्ल इख़्तेयार कर लेगी .

सहाफी  ने पुछा :फिर आप किया करती हैं?
बूढी  खातून बोलीं  :में दो  तीन घंटे बाद शोहर के पास एक गिलास शरबत या  एक कप  चाय या कॉफी ले कर जाती हूँ  और मुहब्ब्त भरे अंदाज़ में कहती हूँ :पी लीजिये .हक़ीक़त में  शोहर को इसी की ज़रूरत होती है पर वो थोड़ी नाराज़गी पर नरम लहज़े  में कहता है नहीं पीना :फिर में अदब और मुहब्बत के साथ  केहती हूं प्लीज़ पी लीजिये :फिर में नार्मल और नरम लहज़े में बात करने लगती हूँ  कुछ ही  लमहे में   वो पूछता है किया में उस से नाराज़ हूँ  ?में कहती हूँ ..नहीं :उस के बाद वो अपनी सख्त कलामी  पर माज़रत (सॉरी )ज़ाहिर करता है और खूबसूरत किस्म की बातें करने लगता है .




*इंटरवयु लेने वाली खातून ने पुछा :और आप उस की ये बाते मान लेती हैं ?
बूढी खातून बोलीं:   बिलकुल  में कोई अनाड़ी थोड़ी हूँ, मुझे अपने आप पर पूरा भ रोसा होता है किया आप चाहती हैं ?मेरा शोहर जब गुस्से में हो तो में उस की हर बात का यकीन कर लूं और जब वो पुर सुकुन हो तो उस की कोई बात ना मानूं   



खातुन सहाफी ने पूछा :और आप की ईज्जते नफ्स ?(self respect) 
   बुढी खातुन बोलीं :पहली बात तो ये कि मेरी ईज्जते नफ्स सेल्फ रिसपेक्ट उसी वक्त है जब मैरा शोहर मुझ से राज़ी हो और हमारी शादी शुदा ज़िन्दगी पुर सुकून हो  

 *दुसरी बात ये कि में ईतनी पागल या बैवफा नहीं कि उस के गुस्सा आ जाने वाले वक़्त पर उसके तमाम मोहब्बत भरे पलो को ,और उसकी सारी कुरबानिया जो मेरे लिए और मेरे बच्चौ के लिये दी होती है वो भूल जाउं वो   सख्त तैज़ धुप मे काम पर जाना वो शिद्दत की सरदी की सर्द शबों(ठंडी रातों) में गरम बिस्तर छौड कर काम के लिये बाहर जाना वो तैज़ बारिशों में भीगते हुए आना हर वक़्त घर की बेहतरी के लिये उसका फिक्र मन्द रहना !

तीसरी और लास्ट बात समझने की ये की शोहर बीवी के दरमियान इज़्ज़ते नफ़्स नाम की कोई चीज़ नहीं होती 
जब बीवी खुद अपने आप को और अपनी हर चीज़ को अपनी इज़्ज़त को  अपने शोहर को सौंप देती है तो फिर उस के सामने केसी इज़्ज़ते नफ़्स ?

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